मध्य प्रदेश सरकार ने एक विवादास्पद आदेश वापस ले लिया है जिसमें छात्रों को नागरिकता संशोधन अधिनियम (सीएए) के विरोध प्रदर्शनों में भाग लेने से रोका गया था। यह निर्णय छात्र संगठनों के विरोध प्रदर्शनों के बाद लिया गया है, विशेष रूप से वामपंथी समूहों ने इस आदेश की कड़ी निंदा की थी। सरकार का पिछला आदेश छात्रों की अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर अंकुश लगाने के रूप में देखा जा रहा था। विपक्ष ने भी सरकार पर छात्रों की आवाज दबाने का आरोप लगाया था। अब, सरकार का कहना है कि आदेश छात्रों को किसी भी तरह की राजनीतिक गतिविधियों में शामिल होने से रोकने के लिए नहीं था। इस फैसले को छात्रों और नागरिक समाज कार्यकर्ताओं द्वारा स्वागत किया गया है, जिन्होंने इसे लोकतंत्र के लिए एक महत्वपूर्ण जीत बताया है। यह घटना राज्य में राजनीतिक बहस और छात्र अधिकारों के महत्व को उजागर करती है।
English
Français
Español
हिन्दी
中文