गिनी-बिसाऊ में विपक्षी दलों, पीएआई-टेरा रंका और एपीआई-काबस गरंडी ने अंतर्राष्ट्रीय समुदाय से संविधान में संशोधन पर हो रहे जनमत संग्रह को मान्यता न देने का आग्रह किया है। उनका आरोप है कि यह जनमत संग्रह धोखाधड़ी से भरा है और इसकी वैधता संदिग्ध है। विपक्षी दलों का कहना है कि सरकार ने इस प्रक्रिया में निष्पक्षता और पारदर्शिता का पालन नहीं किया है। उन्होंने अंतर्राष्ट्रीय पर्यवेक्षकों से इस मामले में हस्तक्षेप करने और स्वतंत्र जांच करने की मांग की है। उनका मानना है कि इस जनमत संग्रह को मान्यता देने से देश में लोकतंत्र और कानून के शासन पर नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। विपक्षी दलों ने सरकार पर लोकतांत्रिक मूल्यों का सम्मान करने और समावेशी संवाद के माध्यम से संविधान में संशोधन करने का दबाव डाला है। इस मामले में अंतर्राष्ट्रीय समुदाय की प्रतिक्रिया का देश की राजनीतिक स्थिति पर महत्वपूर्ण प्रभाव पड़ेगा।