पिछले दो दशकों में ग्रीनलैंड में आग लगने की घटनाओं में वृद्धि देखी गई है, विशेष रूप से 2017 और 2019 में बड़ी आगें लगी थीं। इस वर्ष वर्षा की कमी के कारण मिट्टी में सूखे की स्थिति उत्पन्न हो गई है। वैज्ञानिक इस स्थिति को लेकर चिंतित हैं क्योंकि इससे ग्रीनलैंड की पारिस्थितिकी तंत्र पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। सूखे के कारण वनस्पति अधिक ज्वलनशील हो गई है, जिससे आग लगने का खतरा बढ़ गया है। यह जलवायु परिवर्तन के प्रभावों का एक स्पष्ट संकेत है, जिससे आर्कटिक क्षेत्र विशेष रूप से प्रभावित हो रहा है। आग से निकलने वाला धुआं वायु गुणवत्ता को भी प्रभावित कर सकता है और ग्लोबल वार्मिंग में योगदान कर सकता है। स्थिति की निगरानी की जा रही है और आग को नियंत्रित करने के प्रयास जारी हैं।