'स्कूल Rakyat' नामक शिक्षा कार्यक्रम को लेकर समाज में बहस छिड़ गई है। इस कार्यक्रम पर खर्च होने वाला बजट, कुल आवंटित बजट का लगभग आधा हो गया है, जिससे चिंताएं बढ़ गई हैं। आलोचकों का कहना है कि इस तरह का भारी खर्च उचित नहीं है, जबकि समर्थकों का मानना है कि यह हाशिए पर रहने वाले समुदायों के लिए शिक्षा का एक महत्वपूर्ण अवसर है। इस योजना के उद्देश्य उन लोगों तक पहुंचना है जिन्हें पारंपरिक शिक्षा प्रणाली से लाभ नहीं मिल पाया है। हालांकि, कार्यक्रम की प्रभावशीलता और वित्तीय प्रबंधन पर सवाल उठाए जा रहे हैं। सरकार इस योजना को सफल बनाने के लिए प्रतिबद्ध है, लेकिन विरोध और आलोचनाओं को दूर करना एक चुनौती बनी हुई है। इस पहल का भविष्य अभी भी अनिश्चित है, क्योंकि हितधारक इसके दीर्घकालिक प्रभावों का मूल्यांकन कर रहे हैं।