आइंस्टीन के सापेक्षता सिद्धांत के कारण जीपीएस उपग्रहों में लगे परमाणु घड़ियों की गति पृथ्वी पर मौजूद घड़ियों से थोड़ी तेज होती है। इस अंतर को ध्यान में रखकर ही जीपीएस तकनीक सटीक रूप से काम कर पाती है। यदि इस प्रभाव को समायोजित नहीं किया जाता, तो जीपीएस की स्थिति निर्धारण में प्रतिदिन कई किलोमीटर की त्रुटि आ सकती थी। वैज्ञानिकों ने इस सिद्धांत की पुष्टि की है और जीपीएस सिस्टम को डिज़ाइन करते समय इसे शामिल किया है। यह सापेक्षता का एक व्यावहारिक अनुप्रयोग है जो हमारे दैनिक जीवन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। जीपीएस उपग्रहों को प्रक्षेपित करते समय, उनकी घड़ियों को जानबूझकर धीमा प्रोग्राम किया जाता है ताकि पृथ्वी की कक्षा में पहुंचने के बाद वे सही गति से चल सकें। यह समायोजन जीपीएस की विश्वसनीयता और सटीकता सुनिश्चित करता है।