सरकार द्वारा प्रस्तुत नई सुरक्षा योजनाओं को लेकर संवैधानिक विशेषज्ञों ने चिंता जताई है। इन योजनाओं में पुलिस बल के उपयोग, बार-बार अपराध करने वालों के लिए नियम, जेल में काम करने की व्यवस्था और आपराधिक रिकॉर्ड से जुड़े प्रस्ताव शामिल हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि ये प्रस्ताव संविधान के अनुरूप नहीं हो सकते और मानवाधिकारों के मानकों का उल्लंघन कर सकते हैं। विशेष रूप से, पुलिस को अधिक शक्ति देने और आपराधिक न्याय प्रणाली को सख्त बनाने के प्रयासों पर सवाल उठाए जा रहे हैं। आलोचकों का कहना है कि इन बदलावों से नागरिकों की स्वतंत्रता और अधिकारों पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। सरकार ने अभी तक इन आरोपों का जवाब नहीं दिया है, लेकिन इस मुद्दे पर बहस जारी है। इन योजनाओं के कानूनी और सामाजिक प्रभावों का मूल्यांकन करना महत्वपूर्ण है।