गूगल के चैटबॉट के बढ़ते इस्तेमाल पर यह लेख चिंता व्यक्त करता है। यह सवाल उठाता है कि जब चैटबॉट संतोषजनक जवाब दे रहे हैं, तो लोग आगे खोज क्यों करेंगे? लोग गूगल पर ज़्यादा समय बिता रहे हैं, जो एक प्रवृत्ति है। लेख में कृत्रिम बुद्धिमत्ता द्वारा फैलाई जा रही गलत सूचनाओं को पहचानने के महत्व पर भी ज़ोर दिया गया है। यह कृत्रिम बुद्धिमत्ता के जवाबों पर आँख मूंदकर विश्वास करने के खतरों पर प्रकाश डालता है और आलोचनात्मक सोच की आवश्यकता पर बल देता है। हमें डिजिटल आदतों के प्रति जागरूक रहने और जानकारी की सत्यता का मूल्यांकन करने की आवश्यकता है ताकि हम कृत्रिम बुद्धिमत्ता के 'ज़ॉम्बी' न बन जाएं।