गूगल द्वारा भारत में 15 अरब डॉलर की डेटा सेंटर परियोजना की घोषणा के बाद, पर्यावरण संगठनों ने चिंता व्यक्त की है। इन संगठनों का कहना है कि इस परियोजना से स्थानीय जल संसाधनों और पारिस्थितिकी तंत्र पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। उनका मानना है कि डेटा सेंटर को संचालित करने के लिए बड़ी मात्रा में पानी की आवश्यकता होगी, जिससे जल संकट बढ़ सकता है। गूगल ने इन चिंताओं का जवाब देते हुए कहा है कि वह पानी के उपयोग को कम करने और पर्यावरण पर पड़ने वाले प्रभाव को कम करने के लिए प्रतिबद्ध है। कंपनी ने जल संरक्षण तकनीकों का उपयोग करने और नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों पर निर्भर रहने का वादा किया है। हालाँकि, पर्यावरणविद अभी भी सतर्क हैं और परियोजना के पर्यावरणीय प्रभाव का पूरी तरह से आकलन करने की मांग कर रहे हैं।

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