नवीनतम आँकड़ों के अनुसार, वैश्विक तापमान में वृद्धि 1.37 डिग्री सेल्सियस तक पहुँच गई है, जिससे पेरिस समझौते का 1.5 डिग्री सेल्सियस का लक्ष्य निकट भविष्य में पूरा होना मुश्किल हो गया है। 2025 अब तक का तीसरा सबसे गर्म वर्ष दर्ज किया गया है, जो जलवायु परिवर्तन की गंभीर गति को दर्शाता है। वैज्ञानिक चेतावनी दे रहे हैं कि यदि उत्सर्जन में तत्काल कमी नहीं की गई, तो यह वृद्धि और भी तेज हो सकती है। पेरिस समझौते का मुख्य उद्देश्य वैश्विक तापमान वृद्धि को 2 डिग्री सेल्सियस से नीचे रखना था, और आदर्श रूप से 1.5 डिग्री सेल्सियस तक सीमित करना था। वर्तमान रुझान इस लक्ष्य से काफी दूर है। इस स्थिति के कारण दुनिया भर में चरम मौसम की घटनाओं में वृद्धि होने की आशंका है, जिसमें सूखा, बाढ़ और हीटवेव शामिल हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि तत्काल और ठोस कार्रवाई की आवश्यकता है।