एक नए अध्ययन से पता चला है कि दुनिया भर में ‘हीट स्ट्रेस’ (गर्मी का तनाव) तेजी से बढ़ा है। शोधकर्ताओं ने पाया है कि अधिकांश क्षेत्रों में उष्णकटिबंधीय रातों की संख्या में वृद्धि हुई है – यानी ऐसी रातें जब तापमान 20 डिग्री सेल्सियस से नीचे नहीं उतरता। यह स्थिति मानव स्वास्थ्य और पर्यावरण दोनों के लिए चिंताजनक है। तापमान में यह वृद्धि जलवायु परिवर्तन का एक स्पष्ट संकेत है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस प्रवृत्ति के कारण गर्मी से संबंधित बीमारियां और मौतें बढ़ सकती हैं। इस अध्ययन में वैश्विक तापमान के पैटर्न का विश्लेषण किया गया और भविष्य में और अधिक गंभीर परिणामों की चेतावनी दी गई है। इस खतरे से निपटने के लिए तत्काल कदम उठाने की आवश्यकता है।