अंतर्राष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA) की नवीनतम रिपोर्ट के अनुसार, मई महीने में विकसित देशों में तेल का भंडार 1990 के बाद सबसे निचले स्तर पर पहुँच गया है। OECD देशों में तेल के आपातकालीन भंडार में भारी गिरावट दर्ज की गई है। यह गिरावट वैश्विक तेल आपूर्ति और भू-राजनीतिक तनावों के बीच आई है। एजेंसी ने इस स्थिति को लेकर चिंता व्यक्त की है, क्योंकि यह ऊर्जा सुरक्षा के लिए खतरा पैदा कर सकती है। तेल की कीमतों में अस्थिरता बढ़ने की आशंका है। विशेषज्ञों का मानना है कि उत्पादन में वृद्धि और मांग को कम करने के उपाय आवश्यक हैं। यह स्थिति वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भी प्रभाव डाल सकती है।