वैश्विक स्तर पर तेल की खपत में कमी आने की आशंका जताई जा रही है। अमेरिका, ईरान और इजराइल के बीच चल रहे संघर्षों के कारण आपूर्ति में व्यवधान उत्पन्न हुआ है, जिससे तेल की कीमतों में वृद्धि हुई है। इन परिस्थितियों के चलते उपभोक्ता तेल की मांग कम करने की तैयारी कर रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यह प्रवृत्ति 2026 के अंत तक जारी रह सकती है। आपूर्ति संबंधी समस्याओं और उच्च मूल्यों के कारण वैश्विक तेल बाजार पर दबाव बढ़ रहा है। इस स्थिति का असर विभिन्न देशों की अर्थव्यवस्थाओं पर भी पड़ सकता है। तेल उत्पादक देशों को अपनी नीतियों पर पुनर्विचार करने की आवश्यकता हो सकती है।
