वैश्विक स्तर पर बांडों में गिरावट आई है क्योंकि तेल की कीमतें तेजी से बढ़ रही हैं, जिससे मुद्रास्फीति का खतरा बढ़ गया है। तेल की कीमतों में वृद्धि से निवेशकों की चिंताएं बढ़ गई हैं कि केंद्रीय बैंकों को ब्याज दरें और बढ़ानी पड़ सकती हैं। इससे आर्थिक विकास धीमा हो सकता है। विश्लेषकों का कहना है कि तेल की कीमतों में वृद्धि आपूर्ति संबंधी चिंताओं और मजबूत मांग के कारण है। यह स्थिति वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए एक चुनौती बन सकती है। निवेशकों को अब सावधानी बरतने और अपने पोर्टफोलियो में विविधता लाने की आवश्यकता है।