संसद अध्यक्ष अल्बान बागबिन ने स्पष्ट किया है कि वे राष्ट्रपति द्वारा नियुक्त नहीं हैं और उनकी प्राथमिक निष्ठा राष्ट्रपति के प्रति नहीं, बल्कि संसद और घाना के प्रति है। उन्होंने जोर देकर कहा कि वे स्वतंत्र रूप से कार्य करते हैं और संसद के हितों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध हैं। यह बयान कार्यकारी शाखा से किसी भी संभावित हस्तक्षेप के खिलाफ उनकी स्वतंत्रता और तटस्थता को रेखांकित करता है। स्पीकर बागबिन ने संसदीय संप्रभुता के महत्व पर बल दिया और कहा कि संसद ही अंतिम निर्णय लेने वाली संस्था है। उनका यह वक्तव्य, सरकार और संसद के बीच शक्ति संतुलन को लेकर चल रही चर्चाओं के बीच आया है। इस स्पष्टीकरण का उद्देश्य स्पीकर की भूमिका और जिम्मेदारियों पर किसी भी भ्रम को दूर करना है।