घाना में राष्ट्रपति पद का कार्यकाल चार साल से बढ़ाकर पाँच साल करने के प्रस्ताव को अर्थशास्त्र संस्थान के कार्यकारी निदेशक, प्रोफेसर इसाक बोआडी ने खारिज कर दिया है। उनका तर्क है कि इस कदम से लोकतांत्रिक जवाबदेही कमजोर होगी और देश लंबे समय तक ख़राब शासन के प्रति संवेदनशील हो सकता है। प्रोफेसर बोआडी का मानना है कि मौजूदा चार साल का कार्यकाल सरकार को जनता के प्रति जवाबदेह रखने के लिए पर्याप्त है। कार्यकाल बढ़ाने से सरकार को चुनाव से दूर रहने और जवाबदेही से बचने का अवसर मिल सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि कार्यकाल विस्तार से सरकारी खर्च में वृद्धि होगी, जिसका बोझ आम नागरिकों पर पड़ेगा। यह निर्णय घाना की लोकतांत्रिक प्रक्रिया और शासन व्यवस्था के लिए हानिकारक होगा। इसलिए, प्रोफेसर बोआडी ने इस प्रस्ताव का विरोध किया है।