अमा अता अइडू का उपन्यास 'नाउर सोर राबात जोई' (Notre Sœur Rabat Joie) 1977 में अंग्रेजी में प्रकाशित हुआ था। यह एक विशिष्ट उपन्यास है जिसमें गद्य और मुक्त छंद का मिश्रण देखने को मिलता है। लेखिका ने इसमें नारीवाद, नस्लवाद और अफ्रीकी प्रवासियों के विश्वासघात जैसे महत्वपूर्ण विषयों को उठाया है। कहानी की मुख्य पात्र सिसी है, जिसे यूरोप में रहने के लिए छात्रवृत्ति मिलती है। यूरोप की अपनी यात्रा के दौरान, सिसी औपनिवेशिक इतिहास के गहरे प्रभाव को महसूस करती है। वह देखती है कि कैसे यह इतिहास आज भी अफ्रीका और पश्चिम के संबंधों को प्रभावित कर रहा है। इस लेख में अनुवादक पैट्रिशिया हौफ़िया ग्रेंज के साथ इस कृति पर चर्चा की गई है।