सरकार द्वारा जारी किए गए ट्रेजरी बिलों की मांग में कमी आई है, जहाँ बोलियों की कुल राशि 20% कम रही। 91-दिवसीय ट्रेजरी बिल सबसे अधिक लोकप्रिय रहा, जिसके लिए 2.25 बिलियन GH¢ की बोलियाँ लगाई गईं, जो कुल बोलियों का 53.6% है। यह दर्शाता है कि निवेशकों का रुझान कम हो रहा है। बाजार में ब्याज दरों में वृद्धि जारी है, जो ट्रेजरी बिलों की मांग को प्रभावित कर सकती है। सरकार को अब अधिक आकर्षक ब्याज दरें प्रदान करने की आवश्यकता हो सकती है ताकि निवेशकों को आकर्षित किया जा सके। इस स्थिति का सरकारी वित्त पर असर पड़ सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि आर्थिक परिस्थितियों के कारण निवेशकों का विश्वास कम हो रहा है।
