जर्मनी ने यूरोप और नाटो की सेवा में अपनी सेना को तत्पर करने की घोषणा की है, लेकिन यह अमेरिकी हथियारों पर अपनी निर्भरता को स्वीकार करता है। वाशिंगटन की रणनीतिक बदलावों के बावजूद, जर्मनी अपनी रक्षा आवश्यकताओं के लिए मुख्य रूप से अमेरिका से हथियार खरीद रहा है। यह स्थिति जर्मनी की स्वतंत्र रक्षा नीति अपनाने की इच्छा पर सवाल खड़े करती है। ऐसा प्रतीत होता है कि जर्मनी अभी भी सुरक्षा के लिए अमेरिका पर निर्भर है। यह विरोधाभास जर्मनी के अतीत और वर्तमान सुरक्षा रणनीतियों की जटिलता को दर्शाता है। इस निर्भरता के कारण, जर्मनी की विदेश नीति में भी कुछ सीमाएं आ सकती हैं। यह स्थिति यूरोप की रक्षा स्वायत्तता के लिए भी एक चुनौती है।