जर्मनी ने फ्रांस के साथ मिलकर विकसित किए जा रहे यूरोपीय लड़ाकू विमान परियोजना से अपना हाथ खींच लिया है। यह परियोजना यूरोपीय देशों के बीच रक्षा सहयोग को मजबूत करने के उद्देश्य से शुरू की गई थी। जर्मनी के इस फैसले से यूरोपीय रक्षा प्रयासों को झटका लगा है। अभी तक जर्मनी द्वारा इस फैसले का कोई स्पष्ट कारण नहीं बताया गया है, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि लागत और तकनीकी चुनौतियों के कारण यह कदम उठाया गया है। इस परियोजना के भविष्य को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है, और फ्रांस अब अन्य साझेदारों की तलाश कर सकता है। यह घटनाक्रम यूरोपीय संघ के भीतर रक्षा नीति के समन्वय में आने वाली चुनौतियों को उजागर करता है। Kapitalis ने सबसे पहले इस खबर को प्रकाशित किया।