अमेरिका, दवाओं की कीमतों को कम करने के लिए जर्मनी से समर्थन चाहता है। हालांकि, जर्मनी की स्वास्थ्य मंत्री नीना वारकेन ने इस मामले में सीमित गुंजाइश दिखाई है। उनका कहना है कि जर्मनी इस मुद्दे पर अमेरिका के साथ किसी भी तरह के समझौते के लिए तैयार नहीं है। वारकेन ने स्पष्ट किया कि जर्मनी की दवा मूल्य निर्धारण नीति उसकी राष्ट्रीय संप्रभुता का हिस्सा है। इस नीति में बदलाव करने का कोई इरादा नहीं है। अमेरिका का मानना है कि दवाओं की ऊंची कीमतें अमेरिकी नागरिकों पर अनावश्यक बोझ डालती हैं। जर्मनी का रुख इस बात का संकेत है कि वह अमेरिका के दबाव में नहीं आएगा और अपनी स्वास्थ्य संबंधी नीतियों को स्वतंत्र रूप से निर्धारित करेगा। यह टकराव दोनों देशों के बीच व्यापार और स्वास्थ्य नीति के क्षेत्र में तनाव पैदा कर सकता है।
