जर्मनी की केंद्र-दक्षिणपंथी पार्टी आंतरिक विद्रोह के कगार पर है। फ़्रिडरिक मर्त्स द्वारा “नई शुरुआत” करने का प्रयास शुरू होते ही विफल हो गया है। यह विफलता एक सरोगसी घोटाले के कारण हुई है, जिसने पार्टी के भीतर भारी उथल-पुथल मचा दी है। इस घोटाले के परिणामस्वरूप मर्त्स के नेतृत्व पर सवाल उठने लगे हैं और उनके संभावित उत्तराधिकारियों के बारे में अटकलें तेज हो गई हैं। पार्टी के सदस्य मर्त्स के भविष्य को लेकर चिंतित हैं और इस मामले की निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं। स्थिति पार्टी के लिए एक गंभीर राजनीतिक संकट पैदा कर सकती है और आगामी चुनावों में इसका असर देखने को मिल सकता है। इस घटनाक्रम ने पार्टी के भीतर शक्ति संघर्ष को भी उजागर कर दिया है।