संघीय सरकार इमारतों के नवीनीकरण उपायों के लिए वित्तीय सहायता में भारी कटौती कर रही है। इस कटौती का असर विशेष रूप से किराएदारों पर पड़ेगा, क्योंकि इससे उनके घरों की ऊर्जा दक्षता में सुधार बाधित होगा। विशेषज्ञों का कहना है कि इस कदम से जलवायु लक्ष्यों को प्राप्त करना और भी मुश्किल हो जाएगा। नवीनीकरण परियोजनाओं के लिए धन की कमी से, इमारतों से उत्सर्जन कम करने की गति धीमी हो जाएगी। सरकार का तर्क है कि यह कटौती आर्थिक कारणों से आवश्यक है, लेकिन आलोचकों का कहना है कि यह एक दूरदर्शी नीति नहीं है। इस फैसले से ऊर्जा संक्रमण में प्रगति बाधित होने की आशंका है और जर्मनी के जलवायु तटस्थता के लक्ष्य खतरे में पड़ सकते हैं। इस नीति परिवर्तन से किराये के घरों में रहने वाले कमजोर वर्ग के लोगों पर सबसे अधिक प्रभाव पड़ेगा।