डैक्स में सूचीबद्ध कंपनियां अब जर्मन स्वामित्व में नहीं हैं, यह एक महत्वपूर्ण बदलाव है। विदेशी निवेशकों, जैसे कि अमेरिकी संस्थानों और सॉवरेन वेल्थ फंड्स, का इन कंपनियों में बहुत बड़ा हिस्सा है। इस बदलाव का जर्मनी की अर्थव्यवस्था और नीति पर गहरा प्रभाव पड़ रहा है। जर्मन शेयरधारक अब इन बड़ी कंपनियों के फैसलों में कम भूमिका निभाते हैं। नतीजतन, जर्मन आर्थिक हितों और विदेशी निवेश के लक्ष्यों के बीच टकराव की संभावना बढ़ गई है। यह स्थिति जर्मनी की संप्रभुता और आर्थिक स्वतंत्रता के लिए चुनौतियां खड़ी करती है। इस मुद्दे पर बहस छिड़ गई है कि क्या जर्मनी को विदेशी स्वामित्व को विनियमित करने के लिए कदम उठाने चाहिए।