जर्मनी के राइनलैंड-पालाटिनेट राज्य उच्च न्यायालय ने एक ऐसे व्यक्ति को बरी कर दिया है जिसने सोशल मीडिया पर इजराइल के गाजा पर हमलों की तुलना नाजी शासन से की थी और स्वस्तिक के चित्र साझा किए थे। अदालत ने माना कि यह तुलना स्वतः ही अपराध नहीं है। न्यायालय ने कहा कि इजराइल की कार्रवाइयों की नाजी शासन से तुलना करना, कुछ परिस्थितियों में, कानूनी रूप से सुरक्षित अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का हिस्सा हो सकता है। यह निर्णय अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और घृणास्पद भाषण के बीच की रेखा पर एक महत्वपूर्ण बहस को जन्म दे सकता है। अदालत का फैसले, हालांकि विवादास्पद, जर्मनी में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के सिद्धांतों को दर्शाता है। यह मामला सोशल मीडिया पर इजराइल-फिलिस्तीन संघर्ष पर की जाने वाली टिप्पणियों की संवेदनशीलता को भी उजागर करता है। फैसले के बाद, कई लोगों ने इजराइल और नाजी शासन के बीच तुलना को आपत्तिजनक और अनुचित बताया है।