चीनी वैज्ञानिकों की एक टीम ने एशियाई और अफ्रीकी धान की किस्मों को आपस में संकर करने में आने वाली आनुवंशिक बाधा की पहचान की है। यह खोज उच्च उपज देने वाले संकर बनाने की नींव रख सकती है। एशियाई और अफ्रीकी धान दोनों की अपनी-अपनी खूबियां हैं, लेकिन उन्हें आपस में मिलाने से अक्सर बाँझ पराग और कम उपज वाली संतान पैदा होती है। शोधकर्ताओं ने अब तीन जीनों की पहचान की है जो प्रजनन में बाधा बनते हैं - और समस्या का संभावित समाधान भी। इस सफलता से चावल की खेती में क्रांति आ सकती है, जिससे खाद्य सुरक्षा में सुधार हो सकता है। इस अध्ययन से भविष्य में बेहतर किस्म के चावल विकसित करने में मदद मिलेगी जो अधिक उपज दे सकें और विभिन्न जलवायु परिस्थितियों के अनुकूल हों। यह कृषि विज्ञान के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण प्रगति है।

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