फ़्रांस में एक जॉर्जियाई गिरोह को रूसी साहित्य की दुर्लभ और मूल्यवान मूल प्रतियों की चोरी के आरोप में दोषी ठहराया गया है। यह गिरोह पाँच देशों में सक्रिय था और चोरी किए गए साहित्य को नकली प्रतियों से बदल देता था। अदालत में पेश किए गए सबूतों के अनुसार, गिरोह ने कई महत्वपूर्ण साहित्यिक कृतियों को निशाना बनाया। इस मामले में शामिल आरोपियों को सजा सुनाई गई है, हालांकि सजा की अवधि का खुलासा नहीं किया गया है। अधिकारियों का कहना है कि यह मामला साहित्यिक चोरी और कलाकृतियों के अवैध व्यापार के खिलाफ एक महत्वपूर्ण जीत है। इस घटना ने दुर्लभ पुस्तकों की सुरक्षा और कला बाजार में जालसाजी को लेकर चिंताएं बढ़ा दी हैं। जांच अभी भी जारी है और गिरोह के अन्य संभावित सदस्यों की तलाश की जा रही है।