जी7 शिखर वार्ता में पश्चिमी देशों के बीच कई मुद्दों पर मतभेद सामने आए, जिनमें व्यापार, जलवायु परिवर्तन, नाटो, यूक्रेन और रूस शामिल हैं। आईई यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर मैनुअल मुनिज़ के अनुसार, इन मतभेदों के बावजूद, गठबंधन को बनाए रखना ही इस शिखर वार्ता की सबसे बड़ी सफलता थी। उनका कहना है कि पिछले कुछ दशकों में अटलांटिक के दोनों ओर इतने व्यापक मतभेद पहले कभी नहीं देखे गए। शिखर वार्ता का मुख्य ध्यान अब 'वैश्विक शासन' पर केंद्रित हो गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह वार्ता पश्चिमी देशों के बीच तनाव को कम करने और सहयोग को बढ़ावा देने का एक महत्वपूर्ण अवसर थी। कुल मिलाकर, यह शिखर वार्ता चुनौतीपूर्ण रही, लेकिन पश्चिमी देशों की एकजुटता बनाए रखने में सफल रही। भविष्य में 'वैश्विक शासन' के मुद्दों पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा।