पेरू की नई सरकार में प्रधानमंत्री लुइस गलारेटा के नेतृत्व में गठित पहली कैबिनेट, देश के संकट का सामना करने के लिए तकनीकी टीम बनाने के बजाय राजनीतिक संबंधों को मजबूत करने और सत्ता के बंटवारे पर केंद्रित है। यह नियुक्ति राजनीतिक एहसान चुकाने और आंतरिक संतुलन बनाए रखने की रणनीति का संकेत देती है। कैबिनेट में पुराने और विवादित चेहरों को शामिल किया गया है, जो सरकार की तकनीकी क्षमता पर सवाल खड़े करती है। आलोचकों का कहना है कि यह कदम देश की गंभीर चुनौतियों से निपटने में बाधा उत्पन्न कर सकता है। यह स्पष्ट है कि केइको फुजिमोरी ने राजनीतिक दबाव और गुटीय हितों को ध्यान में रखते हुए यह निर्णय लिया है। इस नियुक्ति से सरकार के प्रदर्शन और देश के भविष्य पर नकारात्मक प्रभाव पड़ने की आशंका है। यह नियुक्ति राजनीतिक विश्लेषकों के बीच चिंता का विषय बनी हुई है।

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