रूस की दो सबसे बड़ी शहरों, मॉस्को और सेंट पीटर्सबर्ग में ईंधन की राशनिंग फिर से लागू कर दी गई है। तेल कंपनी रोस्नेफ्ट ने देश भर में सभी स्टेशनों पर ईंधन भरने की सीमा 30 लीटर निर्धारित कर दी है। यह कदम ईंधन की उपलब्धता और वितरण को प्रबंधित करने के लिए उठाया गया है, हालांकि इसके पीछे का सटीक कारण स्पष्ट नहीं है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह मांग में वृद्धि या आपूर्ति संबंधी समस्याओं के कारण हो सकता है। इस निर्णय से आम नागरिकों के लिए ईंधन प्राप्त करना मुश्किल हो सकता है और परिवहन पर प्रभाव पड़ सकता है। रोस्नेफ्ट ने फिलहाल इस पर कोई विस्तृत टिप्पणी नहीं की है, जिससे स्थिति को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है। यह देखना होगा कि यह राशनिंग कितने समय तक जारी रहेगी और इसका रूस की अर्थव्यवस्था पर क्या प्रभाव पड़ेगा।