सरकार ने वैश्विक तेल कीमतों में वृद्धि और रुपिया के मूल्य में गिरावट के मद्देनज़र 'पर्टमैक्स' की कीमत 16,250 रुपिया प्रति लीटर कर दी है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम अपरिहार्य था। इस वृद्धि से सामाजिक अशांति फैलने का जोखिम कम रहने की उम्मीद है। हालांकि, यह निर्णय आम उपभोक्ताओं पर आर्थिक दबाव बढ़ा सकता है। सरकार ने अंतर्राष्ट्रीय बाजार की स्थितियों और मुद्रा विनिमय दर में गिरावट को इस फैसले का मुख्य कारण बताया है। विश्लेषकों के अनुसार, यह मूल्य वृद्धि ऊर्जा क्षेत्र में सरकारी सब्सिडी को कम करने की दिशा में एक कदम है। आगे भी कीमतों में बदलाव की संभावना बनी हुई है, जो वैश्विक तेल बाजार पर निर्भर करेगी।