१९६७ में, एक व्यक्ति बैंक की सीमित समय तक खुलने की वजह से परेशान था। उस समय, बैंक खुलने और बंद होने के समय पर ही पैसे निकाले जा सकते थे, जिससे लोगों को अक्सर इंतज़ार करना पड़ता था। इसी समस्या से निजात पाने के लिए, उसने एक ऐसा मशीन बनाने का फैसला किया जिससे लोग कभी भी पैसे निकाल सकें। २७ जून १९६७ को लंदन के एक Barclays बैंक शाखा की दीवार पर एक धातु का डिब्बा लगाया गया। यह डिब्बा ही आधुनिक एटीएम का शुरुआती रूप था, जिसने पैसे निकालने के तरीके को हमेशा के लिए बदल दिया। इस आविष्कार ने वित्तीय लेनदेन को सरल बनाया और लोगों को पैसे तक चौबीसों घंटे पहुँच प्रदान की। यह घटना आधुनिक बैंकिंग इतिहास में एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हुई।