फ़रग़ान अज़ीहारी के अनुसार, फ्रांस की नियामक संस्था, अरकॉम, सीन्यूज़ जैसे रूढ़िवादी विचारों वाले चैनल पर अंकुश लगाने के लिए दबाव में आ गई है। उनका तर्क है कि यह कदम उदारवादी मूल्यों के विपरीत है। अज़ीहारी का मानना है कि अरकॉम ने उन लोगों की मांगों को मान लिया है जो रूढ़िवादी विचारों को सार्वजनिक बहस में सहन नहीं कर पाते। यह निर्णय अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और मीडिया की बहुलवाद पर सवाल खड़े करता है। आलोचकों का कहना है कि यह एक खतरनाक प्रवृत्ति है जो असहमतिपूर्ण आवाज़ों को दबा सकती है। नियामक संस्था पर आरोप है कि वह राजनीतिक दबाव में आकर काम कर रही है, जिससे स्वतंत्र पत्रकारिता खतरे में पड़ सकती है। इस मामले ने फ्रांस में मीडिया स्वतंत्रता पर एक महत्वपूर्ण बहस शुरू कर दी है।