फ्रांस में आगामी २०२७ के राष्ट्रपति चुनाव के लिए राजनीतिक दलों के बीच आप्रवासन नीति एक प्रमुख मुद्दा बन गया है। हाल ही में, एडवर्ड फिलिप ने मायोत्त की यात्रा के दौरान शरण और परिवार पुनर्मिलन के आवेदनों को निलंबित करने की बात कही। वहीं, उनके प्रतिद्वंद्वी गेब्रियल अट्टाल ने आप्रवासियों की संख्या सीमित करने के लिए संविधान में संशोधन करने का प्रस्ताव रखा है। दोनों उम्मीदवार केंद्रवादी खेमे से हैं और उनकी ये बातें आप्रवासन पर सख्त रुख अपनाने का संकेत देती हैं। यह कदम चुनावी माहौल में मुद्दों को और गरमा सकता है। इन प्रस्तावों का उद्देश्य मतदाताओं को आकर्षित करना और आप्रवासन को लेकर जनता की बढ़ती चिंताओं को दूर करना है। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे राजनीतिक बहस और तेज होगी।