पूर्व राष्ट्रपति फ्रांस्वा होलांद ने समाजवादी पार्टी की प्राथमिकताओं पर अपनी चिंता व्यक्त की है, उनका कहना है कि यह प्रक्रिया विभाजन पैदा कर सकती है। उन्होंने सुझाव दिया कि दिसंबर में इस मुद्दे पर स्पष्टता आनी चाहिए, चाहे वह दक्षिणपंथी हो या वामपंथी। फ्रांस्वा रुफ़िन, जो राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार भी हैं, ने इस पहल को "अलोकतांत्रिक" बताया है। उनका मानना है कि यह प्रक्रिया जनता के प्रति प्रतिकूल है। दोनों नेताओं ने पार्टी के भीतर एकता बनाए रखने की आवश्यकता पर जोर दिया। इस आलोचना से पार्टी के भीतर आगामी चुनावों के लिए रणनीति को लेकर बहस छिड़ सकती है। यह घटना समाजवादी पार्टी के भविष्य और नेतृत्व के लिए महत्वपूर्ण है।

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