फ़्रांस में एक 11 वर्षीय बच्ची, लिहाना, के साथ हुई क्रूरता के मामले ने न्यायिक प्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। हाल ही में जारी एक रिपोर्ट में लापरवाही उजागर हुई है, जिसके बाद जनता में आक्रोश बढ़ गया है। जांच में पता चला है कि मुख्य संदिग्ध, जेरोम बरेला, पर पहले भी यौन हिंसा के आरोप लगे थे, लेकिन महीनों तक उसे पूछताछ के लिए भी नहीं बुलाया गया। इस लापरवाही के कारण मामले की जांच में देरी हुई और बच्ची के साथ हुई भयावह घटना को रोकने का अवसर चूक गया। इस घटना ने फ़्रांस में न्याय व्यवस्था की कार्यप्रणाली पर विश्वास संकट पैदा कर दिया है। मामले की गहन जांच जारी है और सरकार पर जवाबदेही तय करने का दबाव बढ़ रहा है। यह घटना फ़्रांस में बच्चों की सुरक्षा और न्यायिक प्रक्रिया में सुधार की मांग को और मजबूत करती है।
