फ्रांस के आल्प्स में स्थित लेस बॉसन्स ग्लेशियर तेजी से पिघल रहा है। यूरोप में 2026 में आई दूसरी भीषण गर्मी की लहर ने इस प्रक्रिया को और तेज कर दिया है। हालिया तस्वीरों से पता चलता है कि ग्लेशियर के बड़े हिस्से पिघल चुके हैं और मोंट ब्लांक तथा शामोनी क्षेत्र में बर्फ के आवरण के तेजी से गायब होने के स्पष्ट संकेत मिल रहे हैं। वैज्ञानिक इस स्थिति को जलवायु परिवर्तन का परिणाम बता रहे हैं। ग्लेशियर के पिघलने से स्थानीय जल आपूर्ति और पारिस्थितिकी तंत्र पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि तापमान में वृद्धि जारी रही, तो यह ग्लेशियर पूरी तरह से गायब हो सकता है। इस स्थिति से पर्यटन उद्योग पर भी नकारात्मक असर पड़ने की आशंका है।