एक युवा फ़्रान्को-अल्जीरियाई वकील और राजनेता, अमीने एल बाही ने दक्षिणपंथी चरमपंथी समूहों के साथ मेलजोल करने का प्रयास किया। उन्हें जल्द ही यह महसूस हुआ कि उनकी अल्जीरियाई पृष्ठभूमि के कारण उन्हें स्वीकार नहीं किया जाएगा। कथित मित्रों द्वारा दुर्व्यवहार और अपमानित महसूस करने के बाद, अमीने एल बाही को वास्तविकता का सामना करना पड़ा। यह अनुभव उनके लिए एक कड़वी सीख साबित हुआ, क्योंकि उन्हें एहसास हुआ कि दक्षिणपंथी चरमपंथी विचारधारा वाले लोग उनके जैसे पृष्ठभूमि वाले व्यक्ति के साथ सहज नहीं हो सकते। यह घटना फ़्रान्को-अल्जीरियाई समुदाय और दक्षिणपंथी राजनीति के बीच संबंधों पर सवाल उठाती है। इस मामले ने चरमपंथी समूहों में समावेशिता के दावों पर भी संदेह जताया है। अमीने एल बाही का अनुभव दर्शाता है कि नस्लीय और जातीय पूर्वाग्रह अभी भी मौजूद हैं।