फ़्रांस और अल्जीरिया के बीच 27 दिसंबर 1968 को हुए समझौते को लेकर राजनीतिक विरोधियों और चुनाव उम्मीदवारों द्वारा बार-बार बहस छेड़ी जा रही है, जिसमें इसे रद्द करने की मांग की जा रही है। पचास से अधिक वर्षों में कई संशोधनों और न्यायिक सख्ती के बाद इस ऐतिहासिक दस्तावेज़ की कानूनी स्थिति पर सवाल उठ रहे हैं। यह संधि अब राजनीति में एक प्रतीक मात्र रह गई है या इसका कोई वास्तविक कानूनी महत्व बचा है, यह एक महत्वपूर्ण प्रश्न है। कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि बार-बार संशोधन के कारण इसका मूल स्वरूप बदल गया है। इस संधि के वर्तमान स्वरूप और कानूनी वैधता का विश्लेषण करना आवश्यक है। यह समझौता अल्जीरियाई श्रमिकों और उनके परिवारों से संबंधित मुद्दों को संबोधित करता है। वर्तमान में, इस संधि का भविष्य अनिश्चित है और इस पर लगातार राजनीतिक बहस जारी है।