फ्रांस ने अफ्रीकी देशों के लिए अपनी विकास सहायता नीति में बड़ा बदलाव करने का निर्णय लिया है। फ्रांस के मंत्री सेबस्तियन लेकॉर्नु ने मयोट द्वीप की अपनी यात्रा के दौरान इस योजना की घोषणा की। अब सात अफ्रीकी देशों को मिलने वाली वित्तीय सहायता उनके सहयोग पर निर्भर करेगी। यह सहायता विशेष रूप से मयोट में अवैध प्रवासन को रोकने के प्रयासों से जुड़ी होगी। प्रधानमंत्री ने इस नई प्रणाली को 'बोनस-मालस' (Bonus-Malus) के रूप में वर्णित किया है। इसका अर्थ है कि बेहतर सहयोग करने वाले देशों को अधिक लाभ मिलेगा, जबकि विफल रहने वालों की सहायता काटी जाएगी। फ्रांस का लक्ष्य इस कदम के जरिए अवैध प्रवासन की समस्या को जड़ से खत्म करना है। यह नीति फ्रांस और संबंधित अफ्रीकी देशों के बीच कूटनीतिक संबंधों को प्रभावित कर सकती है।

English
Français
Español
हिन्दी
中文