फ़्रांस अब अपने इतिहास के कुछ काले पन्नों को स्वीकार कर रहा है और लंबे समय से विवादित ज़िम्मेदारियों को निभाने को तैयार है। यह लेख अफ्रीका को अतीत की पीड़ाओं से आगे बढ़कर भविष्य की ओर देखने का आह्वान करता है। दासता, उपनिवेशवाद और अफ्रीकी लोगों के साथ हुए अन्याय ऐतिहासिक तथ्य हैं, लेकिन उन्हें लगातार दोहराकर सामूहिक पीड़ितता की भावना में डूबे रहने से कुछ हासिल नहीं होगा। लेखक का मानना है कि तथ्यों की स्वीकृति और क्षतिपूर्ति आवश्यक है, लेकिन इसके बाद अफ्रीका को आगे बढ़ना होगा। सेनेगल के राष्ट्रपति बासिरू डायोमाये फ़ाये का उदाहरण दिया गया है, जो प्रथम विश्व युद्ध के एक सैनिक के पोते हैं, लेकिन उन्होंने अपनी राजनीतिक लड़ाई लड़ी और देश के सर्वोच्च पद तक पहुंचे। उन्होंने सेनेगल से फ्रांसीसी सैन्य अड्डों की शांतिपूर्ण वापसी, सेनेगल के सैनिकों के खिलाफ अपराध की मान्यता और एक बुद्धिमान, विचारशील संप्रभुता की वकालत की है। यह दृष्टिकोण अफ्रीका के लिए एक नए युग का प्रतीक है।
