रुडोल्फ शार्पिंग, जिन्होंने 25 साल पहले बुंडेस्वेहर को अफगानिस्तान भेजा था, ने अब Wehrpflicht (सैन्य सेवा) में वापसी की बात कही है। वे कहते हैं कि खतरों को कम आंकना गलत होगा। शार्पिंग ने अपने उत्तराधिकारी बोरिस पिस्टोरियस पर भी अपनी राय व्यक्त की है। उन्होंने अफगानिस्तान में बुंडेस्वेहर की तैनाती के अपने निर्णय पर विचार व्यक्त किए। वर्तमान भू-राजनीतिक स्थिति को देखते हुए, शार्पिंग का मानना है कि जर्मनी को अपनी सुरक्षा के लिए अधिक सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए। उनका कहना है कि भविष्य में सैन्य सेवा को फिर से लागू करने की आवश्यकता हो सकती है। यह बयान जर्मनी की सुरक्षा नीति पर एक महत्वपूर्ण बहस को जन्म दे सकता है।

English
Français
Español
हिन्दी
中文