1984 के सिख दंगों के दोषी और पूर्व कांग्रेस सांसद सज्जन कुमार का 80 वर्ष की आयु में जेल में निधन हो गया। उन्हें 1984 के सिख दंगों में उनकी भूमिका के लिए दोषी ठहराया गया था और आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई थी। कुमार को दिल्ली के एक जेल में रखा गया था, जहाँ उनकी हालत बिगड़ने के बाद उनकी मृत्यु हो गई। उनकी मृत्यु पर राजनीतिक प्रतिक्रियाएँ सामने आ रही हैं, कुछ लोगों ने इसे न्याय के लिए एक झटका बताया है, जबकि अन्य ने उनके परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त की है। सज्जन कुमार का मामला सिख समुदाय के लिए एक संवेदनशील मुद्दा रहा है, जिसने दंगों में न्याय की मांग की है। उनकी मौत के साथ, इस मामले को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है। यह घटना भारत में सांप्रदायिक हिंसा और न्याय प्रणाली के समक्ष आने वाली चुनौतियों पर प्रकाश डालती है।