अफ्रीका में विदेशी सैन्य ठिकानों के बंद होने के बाद, लगभग 2000 नागरिक कर्मचारी बेरोजगार हो गए हैं। एक साल बीतने के बावजूद इन कर्मचारियों की स्थिति बदतर होती जा रही है। फ्रांस सरकार से मिले मुआवज़े के बावजूद, कई कर्मचारी बैंकों के ऋणी बने हुए हैं और वित्तीय कठिनाइयों का सामना कर रहे हैं। सेनेगल जैसे देशों में हालात “आपदा की कगार” पर हैं। कर्मचारियों को अपनी आजीविका बनाए रखने में संघर्ष करना पड़ रहा है, और बेरोजगारी के कारण आर्थिक असुरक्षा बढ़ रही है। यह स्थिति अफ्रीका में विदेशी सैन्य उपस्थिति कम होने के सामाजिक-आर्थिक परिणामों को उजागर करती है। इस मुद्दे पर तत्काल ध्यान देने और प्रभावित कर्मचारियों के लिए सहायता प्रदान करने की आवश्यकता है।