हाल ही में, भावनात्मक विश्वासघात को भी अब पारंपरिक विश्वासघात के समान ही गंभीर माना जा रहा है। इसमें संदेशों के माध्यम से छेड़छाड़पूर्ण बातचीत करना, अपने साथी से छिपाकर संदेश हटाना, या पूर्व प्रेमियों के साथ गुप्त रूप से संपर्क में रहना शामिल है। विशेषज्ञों का मानना है कि ये गतिविधियाँ, भले ही शारीरिक न हों, रिश्ते में अविश्वास और भावनात्मक दूरी पैदा कर सकती हैं। यह डिजिटल युग में 'माइक्रो-चीटिंग' के रूप में भी उभरा है, जहाँ छोटे-छोटे कार्य भी रिश्ते को नुकसान पहुंचा सकते हैं। इस तरह के व्यवहार को रोकने के लिए, रिश्तों में स्पष्ट संवाद और आपसी सहमति की आवश्यकता है। यह समझना महत्वपूर्ण है कि भावनात्मक जुड़ाव, शारीरिक संबंध के समान ही हानिकारक हो सकता है। इसलिए, रिश्तों को मजबूत बनाए रखने के लिए ईमानदारी और पारदर्शिता आवश्यक है।