एक नए विश्लेषण से पता चला है कि लगातार मैचों का आयोजन खिलाड़ियों पर भारी पड़ सकता है और टीमों के प्रदर्शन को नकारात्मक रूप से प्रभावित कर सकता है। आर्मग टीम इस व्यस्त कार्यक्रम का सबसे बड़ा शिकार बनी है, जिसके कारण उनके सीज़न पर बुरा असर पड़ा। आंकड़ों से यह स्पष्ट है कि छह दिनों के भीतर ही मैच खेलने से टीमों की जीतने की संभावना काफी कम हो जाती है। यह स्थिति खिलाड़ियों को ठीक होने का पर्याप्त समय नहीं देती, जिससे चोट लगने का खतरा बढ़ जाता है और प्रदर्शन में गिरावट आती है। विशेषज्ञों का मानना है कि खेल संघों को खिलाड़ियों के स्वास्थ्य और बेहतर प्रदर्शन के लिए मैचों के बीच उचित समय अंतराल रखना चाहिए। इस मुद्दे पर बहस तेज हो गई है कि क्या खिलाड़ियों के कल्याण को प्राथमिकता दी जानी चाहिए या व्यावसायिक हितों को। आर्मग के मामले ने इस बहस को और भी महत्वपूर्ण बना दिया है।