एक महिला को इस्लामी धर्म के प्रति नफ़रत फैलाने वाले बयान देने के कारण नौकरी से निकाल दिया गया था। इस घटना के बाद, उसके समर्थन में एक धन संग्रह अभियान चलाया गया। आश्चर्यजनक रूप से, इस अभियान में उसे 2.5 बिलियन रुपये (इंडोनेशियाई मुद्रा) की दान राशि प्राप्त हुई है। महिला पर ‘इस्लाम को आतंकवादी संगठन’ कहने का आरोप है, जिसके कारण उसे व्यापक आलोचना का सामना करना पड़ा। हालांकि, दान राशि मिलने से इस मामले में एक नया मोड़ आ गया है। इस घटना ने धार्मिक सहिष्णुता और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता जैसे मुद्दों पर बहस छेड़ दी है। दानदाताओं का मानना है कि महिला को उसकी राय के लिए दंडित किया जा रहा है, जबकि आलोचकों का कहना है कि यह नफ़रत फैलाने वाले विचारों को बढ़ावा देना है।