हरित पार्टी की सांसद सारा ह्यर्क्को ने आप्रवासी बच्चों के लिए डे-केयर की अनिवार्यता का प्रस्ताव रखा है। उनका तर्क है कि यदि आप्रवासी माता-पिता अपने बच्चों को कम उम्र में डे-केयर में नहीं भेजते हैं, तो उनकी फिनिश भाषा सीखने की क्षमता विकसित नहीं हो पाती है। ह्यर्क्को ने यहां तक सुझाव दिया है कि इस मामले में 'अनिवार्यता' पर भी विचार किया जाना चाहिए। उनका मानना है कि डे-केयर बच्चों को भाषा सीखने और समाज में एकीकृत होने में मदद करेगा। यह प्रस्ताव फिनलैंड में आप्रवासन और भाषा शिक्षा पर चल रही बहस का हिस्सा है। हालांकि, इस विचार पर अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है और इस पर आगे चर्चा होने की संभावना है। यह नीति आप्रवासी परिवारों की स्वायत्तता और अधिकारों से संबंधित सवाल भी उठाती है।