फ़िनलैंड के लेखक আরি हासिओ ने फ़िनिश पहचान के बारे में चल रही बहसों के बीच एक महत्वपूर्ण बात कही है। उनका कहना है कि फ़िनलैंड की पहचान आज जैसी है, वह हमेशा से ऐसी नहीं थी। हासिओ का तर्क है कि फ़िनलैंड का इतिहास दर्शाता है कि आप्रवासन के बिना फ़िनिश लोगों का अस्तित्व ही नहीं होता। उन्होंने यह भी याद दिलाया कि फ़िनलैंड की संस्कृति और जनसंख्या का विकास लगातार आप्रवासन से प्रभावित रहा है। यह बयान, फ़िनलैंड में आप्रवासन और राष्ट्रीय पहचान पर जारी संवाद में एक नया दृष्टिकोण जोड़ता है। फ़िनलैंड के इतिहास को समझने के लिए आप्रवासन की भूमिका को स्वीकार करना महत्वपूर्ण है।