फिनलैंड की संसद ने परमाणु हथियारों पर प्रतिबंध हटा दिया है, जिससे देश में इन हथियारों की तैनाती का मार्ग प्रशस्त हो गया है। यह कदम नाटो के साथ फिनलैंड की सैन्य साझेदारी को मजबूत करता है, जो हाल ही में रूस-यूक्रेन युद्ध के कारण बढ़ी है। फिनलैंड ने लंबे समय से अपनी तटस्थता की नीति का पालन किया था, लेकिन रूस के आक्रमण के बाद नाटो में शामिल होने का फैसला किया। मास्को ने पहले ही चेतावनी दी है कि नाटो के परमाणु हथियारों का फिनलैंड में तैनात होना उसकी प्रतिक्रिया को जन्म देगा। रूस इसे अपनी सुरक्षा के लिए खतरे के रूप में देख रहा है। इस फैसले से बाल्टिक सागर क्षेत्र में तनाव बढ़ने की संभावना है। फिनलैंड का कहना है कि यह कदम उसकी सुरक्षा को मजबूत करने के लिए आवश्यक है।
