लैटिटिया मासोन की नई फिल्म ‘उलिसेस’ उनकी निजी जिंदगी से प्रेरित है। यह एक ऐसी माँ की कहानी है जो अपने विकलांग बेटे के लिए समाज में जगह बनाने के लिए संघर्ष करती है। फिल्म भावनात्मक रूप से प्रभावशाली है और विकलांगता के मुद्दे पर प्रकाश डालती है। मासोन ने अपने व्यक्तिगत अनुभवों को फिल्म में ईमानदारी से उतारा है। यह फिल्म सिनेमा में विकलांगता के चित्रण में एक महत्वपूर्ण योगदान मानी जा रही है। ‘उलिसेस’ विकलांग व्यक्तियों के समावेशन और स्वीकृति की वकालत करती है। फिल्म दर्शकों को सहानुभूति और समझ के साथ विकलांगता के मुद्दे पर विचार करने के लिए प्रेरित करती है।
